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ग्रामीण समुदाय के रोजगार हेतु प्रशिक्षण तथा आजीविका विकास केंद्र की रूपरेखा क्या हो?

स्वयं सहायता समूह के साथ अग्रिम कार्य हेतु चौबेपुर ब्लाक में स्थानीय समूहों के साथ संपर्क स्थापित किया गया । इसी क्रम में दिनांक 17 सितंबर को चौबेपुर के ग्रामीण क्षेत्र का भ्रमण तथा स्थलीय निरीक्षण भी किया गया। क्षेत्र भ्रमण तथा स्थलीय निरीक्षण अन्नपूर्णा महिला स्वयं सहायता समूह की संस्थापक माता अन्नपूर्णा तथा पूर्व ग्राम प्रधान श्री सुबोध दीक्षित के सौजन्य से संभव हुआ। सुबोध जी ग्राम विरेचामऊ के पूर्व प्रधान भी रहे हैं। वह मानस ग्राम के माध्यम से जैविक खाद्य पदार्थ के उत्पादक किसानों और स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने अपने प्रधान पद पर रहते हुए ग्राम विरैचामऊ के प्रधान रहते हुए ग्राम के तालाब का सुंदरीकरण कराया तथा वहां किसान पार्क भी स्थापित किया। किसान पार्क परिसर में लगभग एक बीघे की जगह ग्राम समाज के स्वामित्व की है। साथ की बड़ा सा तालाब भी जो कि अनुमान से पांच बीघे का लगता है। इस परिसर में स्थानीय ग्रामीण समुदाय के रोजगार हेतु प्रशिक्षण तथा आजीविका विकास केंद्र की स्थापना जा सकती है। स्वयं सहायता समूहों को साथ मिलकर उन्होंने मानसग्राम कैंटीन स्थापित की। सुबोध दीक्षित बताते हैं कि ये स्टार्ट अप ग्राम स्वरोजगार और ग्रामीण पर्यटन के मकसद से शुरू किया गया । समूहों के लोगों द्वारा शुरू किए गए स्टार्ट अप को बहुत से लोगों की सराहना भी मिली। लगभग ढाई बीघे के परिसर में एक छोटा तालाब दो भवन जैसी संरचनाएं मौजूद हैं। वे इस परिसर में समूहों के लोगों की आजीविका और प्रशिक्षण कार्यों की रूपरेखा बना रहे हैं।


चौबेपुर ब्लाक में निराश्रित पशुओं के लिए ८ गो आश्रय स्थल हैं। इन गो आश्रय स्थलों में प्राप्त जानकारी के अनुसार ३६८ पशु संरक्षित हैं। समूहों के लिए प्रशिक्षण एवं पशुधन आधारित आजीविका विकास गतिविधियों के लिए प्रधानपुर गौशाला का निरीक्षण किया गया। गौशाला में उपलब्ध संरचनाओं के तौर पर शेड और नाद से युक्त स्थल मौजूद है। स्थल में पशुओं के लिए खड़े होकर खाने तथा बैठ कर सुस्ताने की पर्याप्त जगह है। नाद के लिए बने सीमेंट और ईंट की संरचना में पचास नाद बनी हैं। जिसमें बांधने ले लिये हुक भी लगे हैं। इन हुकों में पशुओं को बांध कर रखा जाता है। भूसे और हरे चारे की उपलब्धता स्थानीय निवासियों और पशुपालकों द्वारा की जाती है। नजदीक में गोचर भूमि की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी प्राप्त हुई परंतु उपलब्ध स्रोतों से विस्तृत विवरण प्राप्त नहीं हो सका। मौजूद केयर टेकर और पशुपालकों के विश्वकर्मा पूजा की थी जिसके प्रसाद की मिठाई भी खिलाई।

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